अनहद नाद


कौन सुन रहा है साधु हितकारी

छिद आकाश में हो रही है यह

मधुर मीठी मीठी वाणी

ना मैं सच

ना ये जगत् सच

सच है ये स्वयं की ध्वनि



ॐ नम: शिवाय


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